
पृथ्वी दिवस : पौधों से होता शृंगार, संतुलन रहता बरकरार
पृथ्वी दिवस हमें प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने की सीख देता है। जल, जीव, वन्यजीव और पौधे मानव जीवन को संरक्षित करते हैं। बच्चों में ये सीख जागृत करना अहम है।

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पृथ्वी दिवस 2026 बुधवार को मनाया गया। स्कूलों में जन जागरूकता के तहत जगह-जगह कार्यक्रम आयोजित हुए। बच्चों ने रैली निकालकर पृथ्वी दिवस की शुभकामनाएं दी और लोगों से इसके संरक्षण की अपील की। कई जगह कार्यक्रमों के तहत पौधे भी लगाए और पृथ्वी संरक्षण को लेकर गोष्ठियां हुईं। इसमें लोगों ने बताया कि जल, जीव, वन्यजीव और पौधों का संतुलन मानव जीवन के लिए बहुत आवश्यक है। क्योंकि पृथ्वी के संतुलन में इनकी अहम भूमिका है।
सेंट पॉल्स के विद्यार्थियों ने दिया पृथ्वी संरक्षण का संदेश
राजस्थान के राजसमंद जिले के रिको एरिया स्थित सेंट पॉल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पृथ्वी दिवस के उपलक्ष्य में पर्यावरण चेतना कार्यक्रम हुआ। स्काउट एवं गाइड तथा कक्षा पांचवीं और पहली के विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया। अध्यक्षता विद्यालय व्यवस्थापक फादर बेसिल वसुनिया ने की और मुख्य अतिथि रिटायर सीआई, सीआईडी वहाब खान रहे। मुख्य अतिथि ने कहा पृथ्वी के संरक्षण से ही संपूर्ण जीव -जगत का अस्तित्व हैं और पर्यावरण संरक्षण केवल किसी संस्था या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है ,वरन यह प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। कार्यक्रम की शुरुआत में कक्षा 5वीं के विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण की थीम पर संदेशप्रद कविता, लघु नाटिका ,मनमोहक नृत्य और श्लोगन प्रस्तुत किए। स्काउट-गाइड एवं इको क्लब के विद्यार्थियों ने पेड़ों पर पक्षियों के लिए परिंडे बांधकर शपथ लिया कि वह पर्यावरण संरक्षण में जिम्मेदारी के साथ हर संभव प्रयास करेंगे। कार्यक्रम में स्काउटर आशिफ मोहम्मद, शिक्षक राजेश पालीवाल, जस्टिन वर्गिस, चेतन पानेरी, शशांक सिंह, शिक्षिका सूर्या हरि, जिज्ञासा भट्ट, सीमा दीक्षित, अन्नू राठौड़ तथा अन्य सभी शिक्षकगण उपस्थित रहे।

धरती माता करें पुकार, हरा भरा हो संसार
पृथ्वी दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के ग्राम पढ़ौरी स्थित मां सरस्वती पूर्व माध्यमिक विद्यालय में युवा कौशल विकास मंडल के तत्वावधान में जनजागरूकता कार्यक्रम किया गया। इसमें करीब 180 छात्र-छात्राएं, शिक्षक व स्थानीय लोग शामिल हुए। रैली के दौरान जल, जंगल, जमीन बचाओ और धरती माता करें पुकार, हरा भरा हो संसार जैसे नारों से पूरा गांव गूंज उठा। इस दौरान वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण, पेड़ों की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लोगों को जागरूक किया।

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