
मूक फिल्मों का नायक बोलती फिल्म का खलनायक
भारत की हिन्दी फिल्मों का इतिहास समृद्ध रहा है। रंगमंच के बाद कुछ वर्षों तक मूक फिल्में बनीं जिनमें सिर्फ अभिनय की कला और भाव-भंगिमा वह सब कह देती थी जो शब्द बयां करते हैं। फिर फिल्मों को आवाज का जामा भी पहनाया गया। इंटरनेट की इस दुनिया में इतिहास के पन्ने पलटना सहज हो गया है। उन्हीं पन्नों को पलटते समय कुछ रोचक तथ्य सामने आए। पता चला रंगमंच और मूक फिल्मों में नायक के अभिनय से दिलों में राज करने वाले पृथ्वीराज कपूर को जब बोलती पहली फिल्म में अभिनय मिला तो खलनायक की भूमिका उनके हिस्सा आई।

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गूगल के कुछ पन्ने पलटे तो पता चला कि पृथ्वीराज कपूर का जन्म 3 नवंबर 1906 में हुआ था। उन्होंने मूक फिल्मों और रंगमंच से अपने कॅरियर की शुरुआत की। उन्हें पहली बोलती फिल्म का खलनायक माना जाता हैं। हालांकि उस दौर में जो मूक फिल्में बन रहीं थीं उसमें वह उभरते हुए नायक थे लेकिन जब पहली बोलती फिल्म आलम आरा (Alam Ara) 14 मार्च 1931 को मुंबई के मैजेस्टिक सिनेमा में रिलीज हुई तो लोगों के सामने खलनायक की भूमिका में पृथ्वीराज कपूर नजर आए। बताया जाता है कि निर्देशक अर्देशिर ईरानी ने उनके किरदार के साथ नवाचार किया था। वहीं पहली बोलती फिल्म के नायक बनने का मौका 1906 में मुंबई में जन्मे नायक मास्टर विट्ठल को मिला। वह इस किरदार के लिए मुफीद माने जा रहे थे। उस समय रंगमंच में अभिनय का जादू बिखरने वाली नायिका जुबैदा थीं जो कई मूक फिल्मों में भी काम कर चुकी थीं, निर्देशक ईरानी ने उन्हें पहली बोलती फिल्म की नायिका बनने का मौका दिया। नायिका जुबैदा (jubaida) 1911 में गुजरात के सूरत में जन्मी थीं। वह नवाब और फातिमा बेगम की बेटी थीं, फातिमा बेगम भारत की पहली महिला फिल्म निर्देशक थीं। जुबैदा को पहली बोलती फिल्म में नायिका का किरदार निभाने का मौका दिया गया।
हिंदी फिल्म का पहला गाना कौन सा है?
फिल्म आलम आरा (Alam Ara) एक नए युग की शुरुआत थी। क्योंकि इसके बाद मूक फिल्मों का अंत हो गया। इस फिल्म में पहला गीत था दे दे खुदा के नाम पे प्यारे... इस गीत को हिन्दी सिनेमा का पहला गीत होने का गौरव प्राप्त है। इसे वजीर मोहम्मद खान ने गाया था और फिरोजशाह मिस्त्री और बी. ईरानी ने संगीत से संवारा था। इस गाने के बाद से ही फिल्मों में गीतों का जन्म हुआ।
18 वर्ष चला मूक फिल्मों का दौर
रंगमंच के कलाकारों ने मूक फिल्मों का दौर शुरू किया। इसके पात्र अभिनय और भाव-भंगिमा की दम पर अपने अभिनय की छाप छोड़ते थे। वर्ष 1913 में पहली मूक फिल्म राजा हरिश्चंद्र रिलीज की गई जो पूर्ण लम्बाई वाली थी। फिल्म का निर्देशन और निर्माण दादासाहेब फाल्के ने किया था। इसे पहली पूर्ण लंबाई वाली भारतीय फीचर फिल्म माना जाता रहा। इस फिल्म के नायक दत्तात्रय दामोदर डबके थे जिन्हें पहले हिंदी फिल्म के नायक होने का खिताब मिला। यानि मूक फिल्मों का दौर 1913 (फिल्म राजा हरिश्चंद्र ) से शुरू हुआ है और करीब 18 वर्ष बाद आलम आरा (Alam Ara) के साथ समाप्त हो गया। हालांकि राजा हरिश्चंद्र से पहले कई मूक फिल्में बनी थी लेकिन वह पर्ण फिल्में नहीं थी, कुछ समय की ही शॉर्ट फिल्में थीं।
दुनियां का पहला चल चित्र किसे माना गया?
दुनिया का सबसे पुराना चलचित्र राउंडहे गार्डन को माना गया है। इसमें वास्तविक क्रमिक क्रियाएं दिखाई गई हैं, यह फ्रांसीसी आविष्कारक लुई ले प्रिंस द्वारा निर्देशित एक लघु फिल्म थी। इसे गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है।

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