
महाभारत से जुड़ा है कबड्डी खेल का इतिहास
कबड्डी-कबड्डी-कबड्डी... बचपन में आपने भी इस खेल का खूब मजा लिया होगा। खासकर ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों ने। लेकिन क्या आपने सोचा है आखिर कबड्डी (kabaddi) खेल की उत्पत्ती कैसे हुई, कबड्डी किस देश का खेल है, कबड्डी की शुरुआत कैसे हुई, कबड्डी का इतिहास कितना पुराना है। ग्रामीण अंचलों से निकली कबड्डी आज किस मुकाम में है। तो आइए जानते हैं कबड्डी की अहम जानकारियां।

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कबड्डी का खेल 4000-5000 साल पुराना माना जाता है। इसका इतिहास महाभारत से जुड़ा है (The history of Kabaddi is linked to the Mahabharata)। महाभारत में कौरवों द्वारा चक्रव्यूह की रचना की गई थी, इस चक्रव्यूह (Trap) को भेद कर अभिमन्यु इसके अंदर प्रवेश कर गए थे लेकिन उन्हें चक्रव्यूह से बाहर आना नहीं पता था और कौरवों ने उन्हें घेर लिया था इससे उनकी वीरगति हुई थी। कहते है उसी चक्रव्यूह और अभिमन्यु की याद में लोगों ने कबड्डी की शुरूआत की। इसमें एक व्यक्ति दूसरे विरोधी खेमे में अकेले घुसता है और लोगों को छूकर परास्त करने की कोशिश करता है। साथ ही भगवान गौतम बुद्ध (Lord Gautam Buddha) भी अपनी आंतरिक शक्ति और सहनशक्ति को जानने के लिए इस खेल का इस्तेमाल करते थे। हालांकि ईरान (iran) के लोग कबड्डी खेल का जन्म सिस्तान शहर से मानते हैं। कबड्डी को सांघा (Sangha), हूडुगु (hoodugu), चेन्नई (Chennai) भी कहते कबड्डी की शुरुआत भारत में हुई थी। इसलिए इसे भारत का राष्ट्रीय खेल भी माना जाता है। भारत के विभिन्न हिस्सों में यह खेल अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जैसे उत्तर भारत में सांघा, पंजाब में कबड्डी, तमिलनाडु में चेन्नई और कार्नाटक में हूडुगु नाम से इसे जानते हैं।
कबड्डी को कब मिली मान्यता
When did Kabaddi get recognition कबड्डी को राष्ट्रीय खेल का दर्जा 1918 में दिया गया (Kabaddi was recognized in-1918)। कबड्डी के नियम भी उसी वर्ष बनाए गए लेकिन आधिकारिक तौर पर 1923 के बाद इसे लागू किया गया। कबड्डी को बर्लिन में 1936 ओलंपिक (1936 Olympics in Berlin) से पहले एक प्रदर्शनी खेल के रूप में प्रदर्शित किया गया था। इस खेल को जल्द ही एशिया में लोकप्रियता मिली और इसे 1951 और 1982 में एशियाई खेलों में एक प्रदर्शनी खेल के रूप में शामिल कर लिया गया। इसके बाद 1950 में अखिल भारतीय कबड्डी संघ का गठन हुआ। 1980 में विश्व कबड्डी प्रतियोगिता की शुरुआत हुई थी जो अब तक निरंतर चलती आ रही है। विश्व कबड्डी का औपचारिक गठन 24 मार्च 2018 को हुआ था। विश्व कबड्डी द्वारा प्रतिवर्ष 24 मार्च को विश्व कबड्डी दिवस मनाया जाता है।
कबड्डी खेल के नियम
कबड्डी खेल दो टीमों के मध्य खेला जाता है। (Kabaddi game rules) विरोधी टीम के खिलाड़ियों को छूकर या उन्हें पकड़कर उच्च स्कोर के लिए प्रतिस्पर्धा की जाती है। इस खेल का मुख्य उद्देश्य, विरोधी टीम के कोर्ट में रेड मारकर और एक ही सांस में बिना पकड़े अधिक से अधिक विरोधी खिलाड़ियों को छूकर अंक हासिल करना है। प्रत्येक खिलाड़ी अपने विरोधी टीम के कोर्ट में प्रवेश करते समय बार-बार कबड्डी... कबड्डी... कबड्डी... चिल्लाता है और अपने विरोधियों को छूने की कोशिश करता है। जबकि विरोधी खिलाड़ी उसे पकड़कर उसकी सांस तुड़वाने तक उसे पकड़कर रखते हैं। उसे पकड़ने के लिए वह रणनीतिक रूप से मिलकर प्रयास करते हैं।
कबड्डी खेल में कितने खिलाड़ी होते हैं
वैसे तो गांव गली में खेले जाने वाले कबड्डी खेल में सदस्यों की संख्या की कोई बाध्यता नहीं होती है। (How many players are there in Kabaddi) लेकिन जहां खेल नियमों से होता है वहां प्रत्येक टीम में 12 खिलाड़ी होते हैं। (There are 12 players in the game of Kabaddi) जिनमें से 7 कोर्ट पर और 5 रिजर्व में होते हैं। दोनों टीमें उच्च स्कोर के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं। बारी-बारी से रक्षात्मक टीम और आक्रामक टीमखेलती हैं। कबड्डी का खेल तीन शैलियों यानी तीन अलग-अलग प्रारूपों में खेला जाता हैं। इसका पहला प्रारूप अमर प्रारूप (immortal format) है, इसमें आउट या रिवाइवल का कोई नियम नहीं है। जब कोई खिलाड़ी छुआ जाता है, सीमा से बाहर चला जाता है या पकड़ा जाता है तो उसे कोर्ट से बाहर नहीं भेजा जाता बल्कि प्रतिद्वंद्वी टीम को अंक दिया जाता है। वहीं दूसरा प्रारूप सुरजवीनी (surajvini) है, इसमें जब कोई खिलाड़ी छुआ जाता है या सीमा से बाहर चला जाता है, या पकड़ा जाता है तो संबंधित खिलाड़ी को कोर्ट से बाहर भेज दिया जाता है। प्रतिद्वंद्वी टीम को अंक दिए जाते हैं और साथ ही उनके आउट खिलाड़ियों में से एक को पुनर्जीवित भी किया जाता है। वहीं कबड्डी का तीसर प्रारूप गैमिनी (Gamini) है। इसमें खिलाड़ी को छूने, पकड़ने या सीमा से बाहर जाने पर तब तक बाहर रहना होता है जब तक कि उसकी टीम के सभी खिलाड़ी आउट न हो जाएं। जो टीम प्रतिद्वंद्वी टीम के सभी खिलाड़ियों को आउट करने में सफल होती है उसे एक अंक मिलता है।
किन देशों में हैं कबड्डी टीम
भारत के अलावा, श्रीलंका, जापान, बांग्लादेश, चीन, नेपाल, मलेशिया, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, किर्गिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ओमान, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड, ईरान जैसे देशों के लाखों लोग कबड्डी खेलतें हैं। इनमें से अधिकांश एशियाई देशों के अपने कबड्डी परिसंघ भी हैं। वहीं अर्जेंटीना, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, इटली, केन्या, न्यूजीलैंड, कनाडा, अमेरिका आदि देशों में कबड्डी लोकप्रियता हासिल कर रही है और उन्होंने अपने कबड्डी संघ भी बना लिए हैं।
कबड्डी खेल में क्या संभावनाएं हैं
आईपीएल (ipl) की तरह ही प्रो कबड्डी लीग (Pro Kabaddi League) है। जो एक फ्रैंचाइजी आधारित व्यवसाय मॉडल है। इसमें टीमें लीग में शामिल होने के लिए भारी शुल्क का भुगतान करती हैं। पीकेएल में 12 टीमें हैं, जहां प्रत्येक टीम को प्रवेश के लिए एक निश्चित राशि का भुगतान करना होता है और फिर वे अलग-अलग संस्थाओं के रूप में कार्य करती हैं। उनकी आय का एक बड़ा हिस्सा प्रसारण भागीदारों को मीडिया अधिकार बेचने से आता है। प्रो कबड्डी लीग ने 2014 में अपनी शुरुआत के बाद से मीडिया और डिजिटलीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि की है। पीकेएल के सीजन 9 में 222 मिलियन दर्शकों की संख्या, सीजन 10 यानी पीकेएल के 2023 संस्करण में बढ़कर 351 मिलियन हो गई। कबड्डी में भविष्य में अपार संभावनाएं हैं। जैसे-जैसे प्रो कबड्डी लीग हर साल लोकप्रिय हो रही है। खिलाड़ियों की लोकप्रियता भी बढ़ती जा रही है। खिलाड़ियों की बोली की राशि भी काफ़ी बढ़ गई है। जो लगभग 11,500 डॉलर से बढ़कर 2,50,000 डॉलर हो गई है।
भारत ने जीते सभी कबड्डी वर्ल्डकप
कबड्डी का पहला वर्ल्ड कप 2004 में मुंबई में हुआ, दूसरा 2007 में पनवेल और 2016 में अहमदाबाद में हुआ। भारत की पुरुष कबड्डी टीम जो इस खेल की पारंपरिक दिग्गज मानी जाती है, अब तक आयोजित सभी चार कबड्डी वर्ल्ड कप जीत चुकी है।
महिलाओं का दूसरा कबड्डी वर्ल्डकप बांग्लादेश में
भारत में महिला कबड्डी को भी काफी प्रोत्साहन मिला है (women's kabaddi League 2025)। पहली एशियन वीमेन चौंपियनशिप 2005 (women's championship 2005) में खेली गई। वर्ष 2012 में महिला कबड्डी का पहला वर्ल्डकप (First Women's World Cup 2012) खेला गया। महिला कबड्डी का पहला वर्ल्डकप भारत ने ईरान को हराकर जीता। वहीं दूसरा वर्ल्डकप 17 नंबर 2025 से शुरू हुआ है। जो बांग्लादेश के ढाका के मीरपुर स्थित शहीद सुहरावर्दी इंडोर स्टेडियम में चल रहा है। यह मैच 13 साल बाद हो रहा है।

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